दशहरा क्यों मानते है इस दिन कौन से कार्य करने चाहिए , रावण का पुतला

दशहरा को कहीं कहीं पर दशारा भी लिखा जाता है पर इसका मतलब अलग नहीं है अब हम आपको बताते हैं की दशहरा क्यों मनाया जाता है दशहरा को मनाने के लिए पीछे बहुत से कारण बताए जाते हैं आईए जानते हैं यह कारण कौन-कौन से हैं यह भारत का एक प्रमुख त्यौहार है भारत में इस त्यौहार को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है वैसे तो यह त्यौहार हिंदुओं का त्यौहार है पर इसका आनंद सभी उठाते हैं इस त्यौहार को भारत में अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरह से मनाया जाता है जिससे कि परंपराएं थोड़ी बहुत अलग हो जाती हैं इसीलिए भी इसे मनाने के पीछे अलग-अलग तरक दिए जाते हैं यह त्योहार हिंदी महीना के हिसाब से मनाया जाता है इस त्यौहार की तिथि दशमी तिथि (दसमी दिन) होती है जो कि जो की नवरात्रि का सबसे अंतिम दिन होता है इसीलिए भी इसको धूमधाम से मनाया जाता है क्योंकि इस दिन कहीं जगह कन्याओं को माता के रूप में भोजन कराया जाता है

दशहरा क्यों मनाया जाता है जाने इसके पीछे की कहानी ,दशहरा के दिन का पूजा का मुहूर्त , क्यों जलाया जाता है रावण का पुतला , जाने पूरा सच

क्यों जलाया जाता है

हिंदू मान्यताओं की माने तो दशहरा का बहुत बड़ा महत्व है इस दिन कहा जाता है श्री राम ने रावण का वध, , यानी कि भगवान राम ने लंकापति रावण को मारा था और इस दिन बहुत सी जगह पर बहुत से शहरों में या नगरों में रामलीला नामक नाटक का प्रदर्शन भी किया जाता है इस प्रदर्शन में पूरी रामायण को दर्शाया जाता है की कैसे बुराई पर अच्छाई की जीत होती है और बहुत सी जगह वहां पर रावण, मेघनाथ, कुंभकरण, तीनों के विशाल स्वरूप को दहन (अर्थात जलाया जाता है)किया जाता है यह तीनों उसे समय के बहुत बड़े राक्षस थे इन तीनों में उस समय मेघनाथ सबसे ज्यादा शक्तिशाली राक्षस बताया जाता है

इसके साथ-साथ बहुत सी जगह पर अलग-अलग रीति-रिवाज के चलते दशहरा के दिन रावण मेघनाथ और कुंभकरण प्रतिरूपक रथ और उनके पुतले(मूर्तियां) भी जलाए जाते हैं इससे आपका पद को याद किया था इससे उनके दहन को याद किया जाता है

दशहरा के दिन लोग अपने घरों को साफ सुथरा करके सजाते हैं मंदिर जाकर पूजा अर्चना करते हैं और आज के दिन और प्रसाद (भगवान की शुद्ध भोजन) बांटते हैं। दशमी के दिन, कुछ लोग अपने नए शिखर यात्रा का आरंभ भी करते हैं

दशहरा एक ऐसा पर्व या त्योहार है जो की बहुत समय से बनाया जा रहा है यह पर्व इसलिए बनाया जाता है क्योंकि इस दिन बुराई पर अच्छाई ने विजय पाली थी और यही कारण है की यह त्योहार दशहरा हिंदुओं को बहुत ही अच्छा लगता है इस दिन जगह-जगह पर बहुत भारी मात्रा में लोग इकट्ठे होकर रावण और मेघनाथ, कुंभकरण तीनों राक्षसों के पुत्रों को जलाया जाता है और शाम के समय बहुत सी जगह पर मेला भी लगाया जाता है जिसमें बच्चों के लिए खिलौने और बड़ों के लिए सिंगर जैसी बहुत सी चीज होती हैं यह मेला कहीं-कहीं पर बहुत ज्यादा बड़ा भी होता है और बहुत सी जगह पर यह लगाया ही नहीं जाता है कहा जाता है कि मेला रामलीला के दसवे दिन ही लगाया जाता है और ऐसे ही हम दशहरा कहते हैं

रामलीला क्या होती है

रामलीला में श्री राम और सीता माता उनके साथ लक्ष्मण और हनुमान जैसे कई योद्धाओं का चरित्र चित्रण दिखाया जाता है इससे हमें चीज मिलती है के हमें जीवन में किस प्रकार रहना चाहिए हमें अपने मां-बाप का कहना मानना चाहिए यह सब कुछ रामलीला में बहुत अच्छे ढंग से दिखाया जाता है जिससे कि देखने में आनंद आता है और इसको हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम समाज के लोग भी आनंद से देखते हैं रामलीला के अंतिम दिन में कुंभकरण, रावण और इंद्रजीत इन तीनों राक्षसों का वध कर दिया जाता है फिर उसके बाद शाम के समय सूर्य अस्त होने के बाद उनके पुतलो को दहन किया जाता है और इससे दहन करके दिखाया जाता है की बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो छोटी सी सच्चाई के सामने तो हर ही जाती है

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